The 1962 India-China War and the Motia Tribe of Uttarakhand: Disintegration, Impact and Reconstruction
भारत बीज युद्ध 1962. भोटिया जनजाति, उत्तराखण्ड, सीमावर्ती समाज, सामाजिक विधटन, पुनर्निर्माण, विधटन
1962 का भारत-चीन युद्ध भारत के इतिहास में केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था. बहिक इसने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। उत्तराखण्ड की मोहिया जनजाति, जो सदियों से भारत-तिब्बत सीमा पर व्यापार, पशुपालन और मौसमी प्रयास पर आधारित जीवन जीती आ रही थी, इस युद्ध के बाद सबसे अधिक प्रभावित जनजातियों में से एक रही। युद्ध से पूर्व भोटिया समाज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर था और भारत तथा तिब्बत के बीच व्यापारिक एवं सांस्कृतिक सेतु की भूमिका निभाता था।
भारत-चीन युद्ध के बाद सीमा को बंद कर दिए जाने से भोटिया जनजाति की पारम्परिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह टूट गई। सीमावर्ती व्यापार का समापन होना, पशुपालन में गिरावट और आजीविका के साधनों का अभार उनके लिए गंभीर संकट बन गया। उड़ी संख्या में लोगों को अपने पैतुक गांव छोडकर निचले क्षेत्रों में बसना पड़ा जिससे सामाजिक संरचना और सामुदायिक जीवन कमजोर हुआ। इसके साथ ही सेना की बढ़ती उपस्थिति और प्रशासनिक नियंत्रणों ने उनकी पारम्परिक जीवन शैली में गहरा हस्तक्षेप किया। तिब्बत से संपर्क टूटने के कारण भोटिया समाज की भाषा रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परम्पराओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा। युद्धोत्तर काल में सरकार द्वारा पुनर्यास और सीमांत विकास से जुड़ी योजनाएं लागू की गई परन्तु ये प्रयास समुदाय की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सके। समय के साथ भोटिया जनजाति ने कृषि, आगवानी, पर्यटन, हस्तशिल्प और सरकारी सेवाओं को वैकल्पिक आजीविका के रूप में अपनाया। शिक्षा के प्रसार से नई पीढी को नए अवसर मिले, किंतु पारम्परिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना एक चुनौती बन गया है।
भारत चीन युद्ध 1962 न केवल दो देशों के बीच सीमाओं का संघर्ष था बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों में निवास करने वाले जनसमुदायों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालने वाली एक ऐतिहासिक घटना भी थी। उत्तराखण्ड की भोटिया जनजाति, जो तिब्बत से अगने वाले सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे- मुम्स्यारी, जौहार, दारना, व्यास्र, नीति-माणा घाटियों में निवास करती थी इस युद्ध से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुई। इस युद्ध से भोटिया समुदाय का विघटन होना शुरू हो गया। युद्ध के बाद भारत-तिब्वत सीमा को बंद कर दिया गया, जिससे नोटिया जनजाति का सदियों पुराना व्यपारिक और सांस्कृतिक सम्व तिब्बत से टूट गया। संरचना पूरी तरह से विघटित्त हो गई। साथ ही तिब्बती संस्कृति से गहरे जुड़ाव याले
सामाजिक-सांस्कृतिक सम्बन्ध भी समाप्त हो गए। इस विधटन ने उनके जीवनयापन पहचान और परम्परागत आर्थिक बाँचे को अस्थिर कर दिया
: https://doi.org/10.56975/ijvra.v3i9.700753
Registration ID: IJVRA_700753 Published ID: IJVRA2509001
"The 1962 India-China War and the Motia Tribe of Uttarakhand: Disintegration, Impact and Reconstruction", IJVRA - International Journal of Versatile Research and Analysis (www.IJVRA.org), ISSN:2984-8903, Vol.3, Issue 9, page no.1-6, September-2025, Available :https://ijpub.org/IJVRA/papers/IJVRA2509001.pdf
Paper Reg. ID: IJVRA_700753
Published Paper Id: IJVRA2509001
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DOI: https://doi.org/10.56975/ijvra.v3i9.700753
ISSN: 2984-8903 | IMPACT FACTOR: 9.12 Calculated By Google Scholar | ESTD YEAR: 2023
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